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*BNS 170 की जमानत पर ‘रेट फिक्स’ का आरोप? मैडम बाबुओं की मनमानी से वकील व आमजन परेशान*

BNS 170 की जमानत पर ‘रेट फिक्स’ का आरोप? मैडम बाबुओं की मनमानी से वकील व आमजन परेशान

बिलासपुर। शहर के सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में धारा 151 के तहत जमानत प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, यहां जमानत के लिए कथित रूप से “रेट लिस्ट” तय है, जिसे बाबुओं द्वारा व्यक्ति की स्थिति और पहचान के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

बताया जा रहा है कि पट्टा-पर्ची और जरूरी दस्तावेज होने के बावजूद बिना पैसे के जमानत मिलना मुश्किल हो जाता है। आरोप है कि “पैसा दो तो जमानत, नहीं तो जेल” जैसी स्थिति बन गई है, जिससे वकीलों व आम नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है।

₹6000 प्रति व्यक्ति लेने का आरोप।

सूत्रों के अनुसार हाल ही में सिविल लाइन पुलिस द्वारा पकड़े गए 9 जुआरियों को सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था। जिसमें पुलिस द्वारा BNS की धारा 170 व, जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी और सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था लेकिन इस मामले में यह दावा किया जा रहा है कि प्रत्येक व्यक्ति से करीब ₹6000 लेकर जमानत दी गई। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

जब इस मामले में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे संदेह और गहरा गया है।

पहले भी कलेक्टर हो चुकी है शिकायत

गौरतलब है कि इस तरह के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं। इस संबंध में कलेक्टर को शिकायत भी दी जा चुकी है, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। कुछ समय पहले वकीलों ने भी इस कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध जताया था।

कार्यालय व्यवस्था पर भी सवाल

सूत्रों का कहना है कि कार्यालय के अंदर नगर सैनिकों से बाबुओं का काम करते है, जबकि उनकी ड्यूटी गेट पर होनी चाहिए। कई बार वे बाबुओं की कुर्सी पर बैठे नजर आते हैं, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है?

वकील व जनता के बीच बढ़ता आक्रोश

लगातार सामने आ रही ऐसी शिकायतों से आमजन में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब सिस्टम ही भ्रष्ट हो जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और कलेक्टर इस गंभीर मामले में क्या संज्ञान लेते है? और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।?

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