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*नगर निगम जोन-2 में 15 लाख रुपये के कथित गबन का मामला फिर गरमाया, एक साल बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर उठे सवाल**

*नगर निगम जोन-2 में 15 लाख रुपये के कथित गबन का मामला फिर गरमाया, एक साल बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर उठे सवाल*

बिलासपुर। नगर निगम के जोन क्रमांक-2 में करीब 15 लाख रुपये के कथित गबन और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का मामला एक बार फिर चर्चा में है। लगभग एक वर्ष पहले दर्ज कराई गई शिकायत पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि सरकारी संपत्ति और टैक्स से जुड़े मामलों में वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ एफआईआर अब तक क्यों दर्ज नहीं की गई, और यदि आरोप निराधार हैं तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।

शिकायत के अनुसार, जोन-2 में जेसीबी मशीन, पानी के टैंकर, लोहे के बिजली पोल, टैंकर स्टैंड तथा स्टील रेलिंग जैसी सरकारी संपत्तियों को काटकर कबाड़ी को बेचने और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में वार्ड के पार्षद ने करीब एक वर्ष पहले शिकायत की थी, लेकिन आज तक मामले में कोई निर्णायक कार्रवाई सामने नहीं आई। इससे शिकायतकर्ता में न्याय नहीं मिलने की भावना और गहरी हुई है।

इस बीच भाजपा की पार्षद एवं एमआईसी सदस्य सीमा संजय सिंह ने भी नगर निगम आयुक्त को लिखित आवेदन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि सरकारी धन और संपत्तियों के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं हुईं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास किया गया।

यह मामला केवल शिकायत तक सीमित नहीं रहा। नगर निगम की सामान्य सभा में भी इस पर जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए, लेकिन उसके बाद भी न किसी अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई, न किसी ठेकेदार पर कार्रवाई की गई और न ही पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या नगर निगम में जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।

यदि सरकारी संपत्ति वास्तव में बेची गई और लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं बल्कि जनता के विश्वास से भी जुड़ा विषय है। वहीं यदि जांच में आरोप सही नहीं पाए गए हैं, तो प्रशासन को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि भ्रम और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप समाप्त हो सकें।

विपक्ष का आरोप है कि मामला महापौर के संज्ञान में आने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के लिए पूरे प्रकरण को लंबित रखा गया है। नगर निगम अक्सर पारदर्शिता, सुशासन और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात करता है, लेकिन जोन-2 का यह मामला उन दावों की परीक्षा ले रहा है।

हालांकि, नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक जांच की वर्तमान स्थिति या अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में अब लोगों की निगाहें नगर निगम और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जनता यह जानना चाहती है कि 15 लाख रुपये के कथित गबन की जांच आखिर किस चरण में है, जिम्मेदारों की पहचान कब होगी और यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो दोषियों के खिलाफ एफआईआर और अन्य कानूनी कार्रवाई कब की जाएगी। क्योंकि भ्रष्टाचार के मामलों में केवल कथित गबन ही नहीं, बल्कि उस पर लंबे समय तक बनी रहने वाली प्रशासनिक चुप्पी भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

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