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*आबकारी विभाग के ऑडिट पर सवाल, 65 में से 20 शराब भट्टियां घाटे में — क्या मिलीभगत से चल रहा खेल?*

*आबकारी विभाग के ऑडिट पर सवाल, 65 में से 20 शराब भट्टियां घाटे में — क्या मिलीभगत से चल रहा खेल?*

बिलासपुर।जिले में संचालित शराब दुकानों (भट्टियों) को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। लगभग 65 शराब भट्टियों में से करीब 20 के “माइनस” में चलने की जानकारी सामने आने के बाद आबकारी विभाग के ऑडिट सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह जताया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इन भट्टियों में हर महीने लाखों रुपये का गमन है। जबकि नियम के अनुसार आबकारी विभाग द्वारा नियमित ऑडिट किया जाता है, ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर लगातार घाटे की स्थिति कैसे बनी हुई है?

*ऑडिट प्रक्रिया पर उठे गंभीर आरोप*
जानकारी यह भी सामने आई है कि ऑडिट का कार्य करने वाले कुछ ऑडिटर अपने अधीन निजी लोगों को नियुक्त कर रहे हैं। ये लोग जब शराब दुकानों का निरीक्षण करने पहुंचते हैं, तो वहां के सुपरवाइजरों से कथित मिलीभगत कर अनियमितताओं को नजरअंदाज कर देते हैं। बदले में मोटी रकम लेने की बात भी सामने आ रही है।

*मधुबन शराब दुकान का मामला बना उदाहरण*
हाल ही में मधुबन स्थित अंग्रेजी व देशी शराब दुकान में करीब 4 लाख रुपये की अनियमितता पकड़ी गई थी। इस मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित सुपरवाइजर और मैनेजर को हटा दिया गया था, वहीं निरीक्षण करने वाले आबकारी इंस्पेक्टर को भी निलंबित कर दिया गया।

यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि यदि एक दुकान में इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है, तो अन्य दुकानों में भी इसी तरह की अनियमितताओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

*राजस्व को नुकसान, जिम्मेदार कौन?*
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शराब भट्टियां लगातार घाटे में दिखाई जा रही हैं, तो यह सीधे तौर पर शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि पूरे सिस्टम की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

*अब सबकी नजर प्रशासन पर,,
अब देखना होगा कि आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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