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*पत्रकार सुशील पाठक की 15वीं पुण्यतिथि: बिलासपुर प्रेस क्लब में श्रद्धांजलि, जीवन और संघर्षों को किया गया याद,*

पत्रकार सुशील पाठक की 15वीं पुण्यतिथि: बिलासपुर प्रेस क्लब में श्रद्धांजलि, जीवन और संघर्षों को किया गया याद,

बिलासपुर। शहर की पत्रकारिता ने एक बार फिर अपने उस जुझारू सिपाही को याद किया, जिसकी कलम सच के पक्ष में उठती रही और जिसकी आवाज़ कभी झुकी नहीं। “सुशील पाठक” की 15वीं पुण्यतिथि पर “बिलासपुर प्रेस क्लब, परिसर भावनाओं से भर उठा। वरिष्ठ और युवा पत्रकारों, अधिवक्ताओं तथा सामाजिक प्रतिनिधियों ने स्वर्गीय पाठक के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और दो मिनट का मौन रखकर उनकी स्मृति को नमन किया।

श्रद्धांजलि सभा केवल औपचारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि यह उस संघर्ष, साहस और प्रतिबद्धता की पुनः स्मृति थी, जो सुशील पाठक की पहचान रही। मंच से साझा किए गए संस्मरणों में उनका निर्भीक स्वभाव, जमीनी पत्रकारिता और आमजन के सरोकारों के प्रति संवेदनशीलता बार-बार उभरकर सामने आई। उपस्थित जनसमूह की आंखों में सम्मान और मन में कसक—दोनों स्पष्ट थे।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार ‘कमलेश शर्मा, ने स्वर्गीय पाठक के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे अपने काम के प्रति अत्यंत सजग और मानवीय दृष्टि रखने वाले पत्रकार थे। उन्होंने उस दर्दनाक घटना का स्मरण कराया, जब पाठक अपने घर के समीप अज्ञात हमलावरों की गोली का शिकार हुए। यह त्रासदी न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे पत्रकारिता जगत के लिए गहरा आघात थी। वर्षों बाद भी अपराधियों का पता न लग पाना, व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है—यह पीड़ा आज भी उतनी ही तीव्र है।

वरिष्ठ पत्रकार एवं अधिवक्ता ‘सलीम काज़ी’ ने कहा कि इस मामले को लेकर प्रेस क्लब ने संगठित रूप से आवाज़ उठाई थी और उच्च स्तर तक न्याय की मांग की गई। उन्होंने बताया कि यह केवल एक व्यक्ति की हत्या का मामला नहीं था, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार था। उस दौर में संगठनात्मक प्रयास हुए, ज्ञापन दिए गए और न्याय की राह तलाशने की कोशिशें की गईं—यह संघर्ष आज भी स्मृतियों में जीवित है।

श्रद्धांजलि सभा में प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष ‘इरशाद अली’ और पूर्व सचिव “दिलीप यादव” ने भी स्वर्गीय पाठक को नमन करते हुए उनके योगदानों को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि सुशील पाठक का व्यक्तित्व नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए प्रेरणा है—सच लिखने का साहस, जोखिम उठाने की क्षमता और जनहित के लिए अडिग रहना उनकी विरासत है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पत्रकारों—”संजीव सिंह” सहित अनेक वरिष्ठ और युवा साथियों—ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। किसी ने उनके साथ की गई रिपोर्टिंग को याद किया, तो किसी ने कठिन परिस्थितियों में उनका मार्गदर्शन। इन स्मृतियों में एक साझा भाव था—सुशील पाठक केवल पत्रकार नहीं, बल्कि पत्रकारों के पत्रकार थे।

सभा के अंत में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि स्वर्गीय पाठक की शहादत को केवल स्मरण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनकी कलम की धार, उनकी सच्चाई और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर पत्रकारिता को और अधिक जिम्मेदार, निर्भीक और जनोन्मुखी बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। पुष्पांजलि के साथ-साथ संकल्प भी लिया गया कि सच की राह पर चलने वाले ऐसे योद्धाओं की याद हमेशा जीवित रहेगी। इस अवसर वरिष्ठ पत्रकार अखिल वर्मा,प्रियंक परिहार,मनीष त्रिपाठी,श्याम पाठक,जितेंद्र थवाईत,दीपक देवांगन,राहुल ठाकुर, जे पी अग्रवाल,नीरज शुक्ला, संतोष मिश्रा,संजय यादव,सतीश मिश्रा,विशाल झा,अमन पांडेय,उदय सिंह ठाकुर,मनीष पाल,दिव्यांशु साहू,पूर्व प्रेस क्लब उपाध्यक्ष मनीष शर्मा,पूर्व सहसचिव रमेश राजपूत,गोपी डे,नरेंद्र सिंह ठाकुर, राजा खान, सुरेश खरे,मनोज दुबे, आलोक अग्रवाल, रवि शुक्ला, हीरालाल वैष्णव, चंद्र कुमार निर्णेजक, मोहम्मद इसराइल (बबलू) विनोद सिंह ठाकुर, लोकेश वाघमारे, उषा सोनी, गुड्डा सदाफले, ललित गोपाल,करण आदिले,चीकू गंधर्व, शाहिद अली,भारती यादव सहित श्रद्धांजलि सभा के दौरान प्रेस क्लब के वरिष्ठ सदस्य और युवा पत्रकार बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने स्वर्गीय सुशील पाठक के साथ जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए उन्हें एक कर्मठ और जुझारू पत्रकार के रूप में याद किया।

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