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*गौरेला शिक्षा विभाग में अवकाश घोटाला? फर्जी संतान पालन अवकाश रद्द, फिर तुरंत मेडिकल अवकाश मंजूर ?*

*गौरेला शिक्षा विभाग में अवकाश घोटाला? फर्जी संतान पालन अवकाश रद्द, फिर तुरंत मेडिकल अवकाश मंजूर ?*

जिला ब्यूरो कृष्णा पांडे,

*आरोपों से घिरे प्रभारी बीईओ संजीव शुक्ला पर कड़ी कार्यवाही की मांग…..*
कृष्णा पाण्डेय जिला ब्यूरो चीफ जीपीएम
*गौरेला–पेन्ड्रा–मरवाही।* विकासखंड गौरेला में अवकाश स्वीकृति के मामले में बड़ी गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है ।
18 वर्ष पूर्ण हो चुकी बेटी के नाम पर ‘संतान पालन अवकाश’ मंजूर, गलती पकड़े जाने पर आदेश रद्द; उसी दिन मेडिकल लीव स्वीकृत होने पर उठे गंभीर सवाल ? गौरेला विकासखंड शिक्षा विभाग में अवकाश स्वीकृति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है जानकारी के अनुसार शिक्षिका  साधना राठौर ने अपनी 18 वर्ष पूर्ण हो चुकी पुत्री के नाम पर संतान पालन अवकाश के लिए आवेदन दिया था। नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को 18 वर्ष पूर्ण हो जाने पर संतान पालन अवकाश की पात्रता स्वयमेव समाप्त हो जाती है बावजूद इसके गौरेला बीईओ (विकासखंड शिक्षा अधिकारी) संजीव शुक्ला द्वारा अवकाश स्वीकृत कर दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जब बीईओ को अपने ही आदेश में की गई गंभीर गलती का पता चला तो आनन-फानन में संतान पालन अवकाश स्वीकृति आदेश को रद्द कर दिया गया।
लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ—उसी दिन शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से मेडिकल अवकाश स्वीकृत कर दिया गया, जिसने कई नए सवाल पैदा कर दिए हैं ?

*बड़ा सवाल….?*

1.जब संतान पालन अवकाश फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर लिया जाना पाया गया, तो शिक्षिका पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई? फिर उसी दिन मेडिकल अवकाश कैसे स्वीकृत हो गया?

2.इस समय पूरे छत्तीसगढ़ में SIR के अंतर्गत शिक्षकों की BLO ड्यूटी लगी हुई है, जिसके कारण राज्य और जिला स्तर से अवकाश पर प्रतिबंध लागू है। फिर यह मेडिकल लीव किस आधार पर मंजूर की गई?

3.जिस डॉक्टर ने शिक्षिका को मेडिकल आधार पर अनफिट बताया है, उसकी प्रमाणिकता पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
क्या मेडिकल सर्टिफिकेट जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया गया ?

*डॉक्टर–बीईओ पर मिलीभगत के आरोप ?*

सू्त्रों का आरोप है कि इस मामले में डॉक्टर और बीईओ के बीच लेन-देन का मामला हो सकता है। आरोप है कि मोटी रकम लेकर मेडिकल अवकाश स्वीकृत किया गया है।

*जांच की मांग तेज,——-?*

जब जिला शिक्षा अधिकारी ने SIR कार्य के कारण स्पष्ट तौर पर शिक्षकों के सभी प्रकार के अवकाश पर प्रतिबंध का आदेश जारी किया है, तब बीईओ द्वारा अपने स्तर से मेडिकल अवकाश स्वीकृत करने की प्रक्रिया कैसे की गई। मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और डॉक्टर द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट की पुष्टि के साथ बीईओ की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

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