[responsivevoice_button voice="Hindi Female" buttontext="यह खबर हिंदी आडिओ में सुने "]

*एसईसीएल सीईडबल्यूएस, गेवरा की “सीबीएम लैब” अब महिलाओं के हाथों में – तकनीकी दक्षता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल**

**एसईसीएल सीईडबल्यूएस, गेवरा की “सीबीएम लैब” अब महिलाओं के हाथों में – तकनीकी दक्षता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल**

17 जुलाई 2025, गेवरा। एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) ने महिला सशक्तिकरण और तकनीकी नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए केंद्रीय उत्खनन कार्यशाला (CEWS), गेवरा स्थित “सीबीएम लैब” (Condition Based Monitoring Lab) को पूर्णतः महिला संचालित प्रयोगशाला के रूप में प्रारंभ किया है।

इस ऐतिहासिक पहल का विधिवत उद्घाटन एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) हरीश दुहन द्वारा निदेशक (तकनीकी – संचालन/परियोजना) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार एवं निदेशक (वित्त) डी. सुनील कुमार की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय महाप्रबंधक गेवरा एके त्यागी, दीपका के महाप्रबंधक संजय मिश्रा, कोरबा के आरके गुप्ता, वर्क्स मैनेजर एके सिंह समेत जेसीसी, कल्याण और सुरक्षा समिति के सदस्य भी शामिल रहे।

**क्या है सीबीएम लैब?**
सीबीएम लैब खनन कार्यों में उपयोग होने वाले भारी उपकरणों की स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने वाली प्रयोगशाला है। यह मशीनों से लिए गए लुब्रिकेंट ऑयल के नमूनों का विश्लेषण कर संभावित घिसाव, खराबी और पुर्जों की स्थिति का पूर्वानुमान लगाती है। लैब में चार प्रमुख परीक्षण – एलीमेंटल एनालिसिस, काइनेमैटिक विस्कोसिटी, केमिकल प्रॉपर्टीज तथा पार्टिकल काउंट – किए जाते हैं।

इन परीक्षणों से उपकरणों की समयपूर्व खराबी को रोका जा सकता है, संचालन में रुकावट कम होती है, मरम्मत लागत घटती है और उत्पादन में निरंतरता बनी रहती है। यह तकनीक खनन कार्यों की दक्षता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।

**महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय पहल**
इस लैब का संचालन अब पूर्णतः महिला इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा, जो कोल इंडिया में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है। कार्यक्रम के दौरान सीएमडी हरीश दुहन ने प्रयोगशाला प्रभारी बबीता पटवाल, सहायक प्रबंधक (उत्खनन) सहित महिला कर्मियों की सराहना की और उत्कृष्ट कार्य के लिए उनका उत्साहवर्धन किया।

उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशाला न केवल तकनीकी उत्कृष्टता की मिसाल बनेगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी एक मील का पत्थर सिद्ध होगी। इस पहल से यह संदेश जाता है कि महिलाएं अब खनन जैसे पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान क्षेत्रों में भी नेतृत्व की भूमिका निभाने को तैयार हैं।

**नवाचार और समावेशन का प्रतीक**
महिला-केंद्रित यह पहल तकनीकी दक्षता, सुरक्षा और संचालन क्षमता को बढ़ावा देने के साथ-साथ विविधता और समावेशन की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है। कोल इंडिया की यह प्रयोगशाला आने वाले समय में नारीशक्ति की सामर्थ्य का प्रतीक बनकर उभरेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *