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**पुलिस चौकी खोडरी की जमीनी हकीकत: कानून व्यवस्था रामभरोसे**

**पुलिस चौकी खोडरी की जमीनी हकीकत: कानून व्यवस्था रामभरोसे**
*रिपोर्ट – कृष्णा पाण्डेय, ब्यूरो चीफ, जीपीएम*

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले की खोडरी पुलिस चौकी इन दिनों बदहाल स्थिति में है। जहां एक ओर पुलिस चौकी को स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था बनाए रखने का मजबूत आधार माना जाता है, वहीं खोडरी की चौकी इसका उलटा उदाहरण बन चुकी है। चौकी के नाम पर केवल एक जर्जर भवन और सूना पड़ा बोर्ड शेष है, जबकि वहां न कोई उप-निरीक्षक है, न सहायक उप-निरीक्षक और न ही कांस्टेबल।

यह चौकी अब सिर्फ नाम की रह गई है, जबकि इसके जरिए आसपास के कई गांवों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। आमतौर पर एक चौकी में कम से कम 10 से 16 पुलिसकर्मियों की नियुक्ति होती है, जिसमें एक प्रभारी, हेड कांस्टेबल और अन्य स्टाफ शामिल होते हैं। इनका काम स्थानीय अपराधों पर अंकुश लगाना, शिकायतों की त्वरित सुनवाई, गश्त और जनता को सुरक्षा का भरोसा देना होता है।

खोडरी चौकी की यह लचर स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही है, बल्कि ग्रामीणों में भय का माहौल भी पैदा कर रही है। जब कोई नागरिक शिकायत लेकर वहां पहुंचता है, तो चौकी बंद मिलती है। ऐसे में उन्हें मुख्य थाना या अन्य दूरस्थ चौकियों की ओर जाना पड़ता है, जिससे समय तो बर्बाद होता ही है, कई बार अपराधी भी मौके का लाभ उठाने से नहीं चूकते।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चौकी में लंबे समय से पुलिस बल की तैनाती नहीं की गई है। इस उपेक्षा के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि खोडरी पुलिस चौकी को शीघ्र पुनः सक्रिय किया जाए, वहां पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाए और नियमित गश्त की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सकें।

चिंता की बात यह है कि यह सब कुछ पुलिस प्रशासन की जानकारी में होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यदि जल्द कार्यवाही नहीं की गई, तो यह क्षेत्र अपराधियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन सकता है।

यह आवश्यक है कि जिम्मेदार अधिकारी खोडरी चौकी की जमीनी हकीकत को गंभीरता से लें और वहां कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाएं। आम जनता का विश्वास पुलिस पर बना रहे, इसके लिए चौकी को फिर से पूरी तरह से कार्यशील करना अब समय की मांग बन चुका है।

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