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**स्वास्थ्य विभाग में शासनादेश की अवहेलना, एनएसयूआई ने दी 24 घंटे की चेतावनी – नहीं माने तो होगा उग्र प्रदर्शन**

**स्वास्थ्य विभाग में शासनादेश की अवहेलना, एनएसयूआई ने दी 24 घंटे की चेतावनी – नहीं माने तो होगा उग्र प्रदर्शन**

**बिलासपुर।** स्वास्थ्य विभाग बिलासपुर में शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद संलग्न कर्मचारियों को मूल पद पर वापिस नहीं भेजे जाने के खिलाफ एनएसयूआई ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को एनएसयूआई के प्रदेश सचिव *रंजेश सिंह* के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं बिलासपुर के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर शासनादेश का पालन नहीं किया गया तो चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने दिनांक *5 जून 2025* से सभी प्रकार के संलग्नीकरण *स्वतः समाप्त* माने जाने संबंधी आदेश जारी किया था। बावजूद इसके बिलासपुर स्वास्थ्य विभाग में कई कर्मचारी अब भी संलग्न पदों पर कार्य कर रहे हैं। रंजेश सिंह ने आरोप लगाया कि न सिर्फ संलग्न कर्मचारियों को कार्य में बनाए रखा गया है बल्कि उन्हें मुख्य प्रशासनिक कार्यभार भी सौंपा गया है, जो शासनादेश की सीधी अवहेलना है।

एनएसयूआई का कहना है कि संयुक्त संचालक कार्यालय खुद संलग्न कर्मचारियों के सहारे चल रहा है और आदेश जारी करने में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि कुछ लोगों को अनुचित लाभ मिलता रहे। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में कुछ कर्मचारियों को वापिस लिया गया है, लेकिन जो कर्मचारी उनके अधीन सालों से संलग्न हैं, उन्हें अब तक मुक्त नहीं किया गया है।

रंजेश सिंह ने कहा कि यह मामला सिर्फ आदेश की अनदेखी नहीं बल्कि विभागीय भ्रष्टाचार और मनमानी का संकेत भी है। यदि तय समयसीमा में सभी संलग्न कर्मचारियों को उनके मूल पद पर नहीं भेजा गया, तो एनएसयूआई उग्र आंदोलन करेगी और इस विषय पर उच्चाधिकारियों को भी लिखित शिकायत दी जाएगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर शासन के आदेश को नजरअंदाज करने का अधिकार संयुक्त संचालक को किसने दिया है?

ज्ञापन सौंपने के दौरान *पुष्पराज साहू, करन यादव, प्रदीप सिंह, अभिषेक कुमार, बिट्टू पाठक, मीत सोनवानी, राहुल मानिकपुरी, राजा खान, राजदेव साहू, सुनील श्रीवास, भोला पटेल* सहित अन्य एनएसयूआई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

एनएसयूआई ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि शासनादेश की पालना में लापरवाही की गई तो स्वास्थ्य विभाग को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

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