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*बिना जांच राजस्व लिपिकों पर कार्रवाई का विरोध, सामूहिक अवकाश और आंदोलन की चेतावनी*

बिना जांच राजस्व लिपिकों पर कार्रवाई का विरोध, सामूहिक अवकाश और आंदोलन की चेतावनी

बिलासपुर। बिलासपुर जिले के राजस्व लिपिक संघ ने सर्पदंश से मृत्यु पर आर्थिक सहायता प्रकरणों में राजस्व विभाग के लिपिकों पर की जा रही कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की है। संघ ने इस संबंध में शासन और पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी भी प्रकार की कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

संघ के अध्यक्ष प्रदीप तिवारी के अनुसार थाना सरकंडा में दर्ज अपराध क्रमांक 936/2026, 937/2026, 938/2026 एवं 940/2026 के तहत तीन लिपिकों को बिना पूर्व सूचना गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद अन्य आठ लिपिकों को नोटिस जारी कर 23 जुलाई को थाना सरकंडा में बयान के लिए बुलाया गया, जहां सभी कर्मचारियों ने उपस्थित होकर पुलिस जांच में पूरा सहयोग दिया।

ज्ञापन में कहा गया है कि सर्पदंश से मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता स्वीकृत करने की प्रक्रिया राजस्व पुस्तक परिपत्र के निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है। पीड़ित परिवार आवेदन एवं शपथ पत्र तहसीलदार अथवा अतिरिक्त तहसीलदार के न्यायालय में प्रस्तुत करता है। रीडर (वाचक) का कार्य केवल न्यायालय के आदेशानुसार प्रकरण दर्ज करना, दस्तावेज प्रस्तुत करना तथा अभिलेखों का संधारण करना होता है। किसी आवेदन या दस्तावेज की सत्यता की जांच अथवा निर्णय लेने का अधिकार संबंधित पीठासीन अधिकारी का होता है।

राजस्व लिपिक संघ के अध्यक्ष प्रदीप तिवारी का कहना है कि समाचारों से यह जानकारी मिली है कि कुछ मामलों में जाली हस्ताक्षर, फर्जी सील और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आदेश प्राप्त किए गए। ऐसे मामलों में केवल रीडर या वाचक को आरोपी बनाना विधि सिद्धांतों के विपरीत है, क्योंकि अंतिम आदेश संबंधित न्यायालय के पीठासीन अधिकारियों द्वारा पारित किए जाते हैं।

संघ के अध्यक्ष प्रदीप तिवारी ने पुलिस प्रशासन से यह भी मांग की है कि विवेचना के दौरान यदि न्यायालय के समक्ष मिथ्या तथ्य अथवा कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं तो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 227 से 231 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

राजस्व लिपिक संघ का कहना है कि वर्तमान कार्रवाई से प्रदेशभर में कार्यरत रीडर एवं वाचकों में भय का वातावरण है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि बिना निष्पक्ष जांच केवल दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले कर्मचारियों पर ही आपराधिक कार्रवाई की जाती रही तो वे निर्भय होकर अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पाएंगे।

संघ अध्यक्ष प्रदीप तिवारी  ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो **28 जुलाई 2026 से सामूहिक अवकाश** पर जाने के साथ आगे चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।

संघ के सभी पदाधिकारी एवं अध्यक्ष प्रदीप तिवारी ने कलेक्टर के माध्यम से  मुख्यमंत्री, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री, गृह मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (गृह), प्रमुख सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) तथा पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है।

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