*सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना में मरीज से दुर्व्यवहार का आरोप, देख लेने धमकी, BMO से हुई शिकायत*

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना में मरीज से दुर्व्यवहार का आरोप, धमकी देने की शिकायत

बेलगहना, बिलासपुर। कोटा ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना में उपचार कराने पहुंचे एक मरीज ने चिकित्सक डॉ. राधेश्याम तिवारी पर लापरवाही, अभद्र व्यवहार एवं धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मरीज के पैर में सूजन और घाव में पस बनने की समस्या होने पर वह उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना पहुंचा। पंजीयन कराने के बाद उसकी मुलाकात डॉ. राधेश्याम तिवारी से हुई। आरोप है कि चिकित्सक ने कुछ दवाइयां एवं मलहम लिखे तथा पांच दिनों तक एंटीबायोटिक इंजेक्शन बाहर से लगवाने की सलाह दी। मरीज का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए पहुंचने के बावजूद उसे इंजेक्शन बाहर से लगवाने की बात कही गई।

मरीज के अनुसार बातचीत के दौरान चिकित्सक द्वारा सम्मानजनक भाषा का उपयोग नहीं किया गया और कथित रूप से तू-तड़ाक कर बात की गई। इसके बाद मरीज ने स्वास्थ्य केंद्र से बाहर निकलकर मामले की जानकारी बीएमओ को फोन पर दी और चिकित्सक के व्यवहार की शिकायत की।

आरोप है कि शिकायत की जानकारी मिलने के कुछ समय बाद डॉ. राधेश्याम तिवारी स्वास्थ्य केंद्र के बाहर आए और मरीज से बहस करने लगे। शिकायतकर्ता के अनुसार इस दौरान चिकित्सक ने कथित तौर पर कहा कि शिकायत करनी है तो कर दो, उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मरीज ने बातचीत के दौरान धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किए जाने का भी आरोप लगाया है।

मरीज का यह भी आरोप है कि जब वह स्वास्थ्य केंद्र की गतिविधियों की जानकारी लेने का प्रयास कर रहा था, तब उससे पहचान पत्र दिखाने और वीडियो बनाने की अनुमति लाने को कहा गया। आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र के कुछ कर्मचारियों ने उसे घेर लिया और विभिन्न बातों के माध्यम से दबाव बनाने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता ने पूरे घटनाक्रम के दौरान मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया है।

मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने संबंधित उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने, चिकित्सक एवं संबंधित कर्मचारियों के व्यवहार की समीक्षा करने तथा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित कराने की मांग की है।

सवाल यह है कि यदि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों के साथ ही कथित तौर पर इस तरह का व्यवहार होगा, तो आम जनता का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा? मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।**

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