**जनसमस्या शिविर में समस्याओं से ज्यादा राजनीति!*
**चपोरा में जिला स्तरीय शिविर में अव्यवस्था, धूप-बारिश से बचाव के इंतजाम कमजोर, पेयजल तक की व्यवस्था नहीं*
* शमीम अंसारी की रिपोर्ट
बिलासपुर/कोटा।** जनपद पंचायत कोटा अंतर्गत ग्राम पंचायत चपोरा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। जनता की समस्याओं के निराकरण के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, भाजपा संगठन महामंत्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, जिला महामंत्री मोहित जायसवाल, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, जनपद पंचायत कोटा सीईओ युवराज सिन्हा, जनपद अध्यक्ष सूरज भारद्वाज सहित कोटा और रतनपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। लेकिन शिविर में पहुंची जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए ही परेशान होना पड़ा।
आरोप है कि शिविर स्थल पर तिरपाल की बेहद कमजोर व्यवस्था की गई थी। धूप से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और बारिश की स्थिति में भी लोगों को राहत मिलने की उम्मीद कम थी। इससे भी गंभीर बात यह रही कि शिविर में आने वाले ग्रामीणों के लिए पीने के पानी की समुचित व्यवस्था तक नहीं की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में ही मूलभूत व्यवस्थाएं नहीं हो पा रही हैं तो गांवों की समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाएगा?
**सड़कें बदहाल, गड्ढे दे रहे हादसों को न्योता**
चपोरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। सड़कों पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, जो किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन समस्याओं पर ठोस कार्रवाई के बजाय मंच से सरकार की उपलब्धियां गिनाने और राजनीतिक बयानबाजी पर ज्यादा जोर दिया गया।
**महंगाई और राशन कार्ड जैसे मुद्दे कहां गए?**
ग्रामीणों के बीच बढ़ती महंगाई भी बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा कई पात्र हितग्राहियों के राशन कार्ड अब तक लंबित बताए जा रहे हैं। रोजगार, सड़क, पेयजल और बिजली जैसी समस्याएं भी ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की चुनौती बनी हुई हैं। बावजूद इसके शिविर में इन जमीनी समस्याओं पर प्रभावी चर्चा और तत्काल समाधान की तस्वीर नजर नहीं आई।
**कांग्रेस पर निशाना, लेकिन अपने क्षेत्र के विकास पर सवाल**
शिविर में भाजपा नेताओं द्वारा सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ कांग्रेस के कार्यकाल पर निशाना साधे जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री तोखन साहू द्वारा वर्ष 2014 से पहले की सरकारों के कामकाज को लेकर सवाल उठाने की बात सामने आई, लेकिन ग्रामीणों का सवाल है कि वर्तमान में उनके सामने खड़ी समस्याओं का समाधान कब होगा?
वहीं जिला महामंत्री मोहित जायसवाल द्वारा भी भाजपा सरकार के कार्यों का गुणगान किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राजनीतिक मंच से उपलब्धियां गिनाने के बजाय नेताओं को अपने क्षेत्र की जमीनी हकीकत पर भी जवाब देना चाहिए। जब गांव की सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं, पेयजल की समस्या है, बिजली और राशन कार्ड से जुड़े मामले लंबित हैं तो आखिर विकास के दावे किस आधार पर किए जा रहे हैं?
**जनसमस्या शिविर या राजनीतिक मंच?**
जनसमस्या निवारण शिविर का मूल उद्देश्य आम जनता की समस्याओं को सुनना और उनका त्वरित समाधान करना है। ऐसे में यदि शिविर में ही अव्यवस्था हो और जनता की वास्तविक समस्याओं से ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी सुनाई दे, तो निश्चित रूप से सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन चपोरा सहित कोटा क्षेत्र की सड़क, पानी, बिजली और राशन कार्ड से जुड़ी समस्याओं पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और शिविर में सामने आई शिकायतों का वास्तविक समाधान कब तक होता है।
Sanjeev singh Address bhartiya nagar bilaspur 7000103836
