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24 घंटे में सुलझे अंधे कत्ल मामले में आरोपी को आजीवन कारावास, वैज्ञानिक विवेचना बनी सजा का आधार**

*24 घंटे में सुलझे अंधे कत्ल मामले में आरोपी को आजीवन कारावास, वैज्ञानिक विवेचना बनी सजा का आधार**

**बिलासपुर।* चौकी बेलगहना, थाना कोटा के अपराध क्रमांक 769/2025, धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के बहुचर्चित अंधे कत्ल मामले में माननीय न्यायालय ने आरोपी **यशराज भानु उर्फ छोटा** (20 वर्ष), निवासी पहाड़बछाली, को **आजीवन कारावास** की सजा सुनाई है।

यह मामला 4 अगस्त 2025 का है, जब पहाड़बछाली निवासी कोटवार गंगा बाई गंधर्व ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच छेदीलाल यादव की बृहस्पति बाई के घर में किसी अज्ञात व्यक्ति ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी है। सूचना पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक **रजनेश सिंह** के निर्देशन में गठित टीम ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में घटनास्थल का वैज्ञानिक ढंग से निरीक्षण किया। विवेचना के दौरान संदेह के आधार पर यशराज भानु उर्फ छोटा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने अपराध स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त **टांगिया** बरामद किया गया, जिसे विधिवत जब्त किया गया।

तत्कालीन बेलगहना चौकी प्रभारी **उप निरीक्षक राज सिंह** ने नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों का पालन करते हुए पूरी विवेचना को वैज्ञानिक तरीके से अंजाम दिया। जांच के दौरान घटनास्थल की **फोटो एवं वीडियोग्राफी सहित ई-साक्ष्यों** का संकलन किया गया, जिससे न्यायालय में अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत हुआ।

विशेष बात यह रही कि मुकदमे के दौरान कई गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए, लेकिन आरोपी के **मेमोरेंडम, बरामदगी, वैज्ञानिक साक्ष्यों और सशक्त विवेचना** के आधार पर न्यायालय ने अपराध सिद्ध मानते हुए आरोपी को **आजीवन कारावास** की सजा सुनाई।

यह फैसला दर्शाता है कि वैज्ञानिक जांच, डिजिटल साक्ष्यों और विधिसम्मत विवेचना के माध्यम से, प्रत्यक्ष गवाहों के कमजोर पड़ जाने पर भी अपराधियों को न्यायालय से कठोर सजा दिलाई जा सकती है।

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