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43 लाख के खाद गबन पर FIR क्यों नहीं?जांच में जिम्मेदार तय, पुलिस में पत्र भी पहुंचा; फिर FIR क्यों नहीं?

43 लाख के खाद गबन पर FIR क्यों नहीं?

  • जांच में जिम्मेदार तय, पुलिस में पत्र भी पहुंचा; फिर FIR क्यों नहीं?

पीतांबर निषाद। संस्था प्रबंधक, सेवा सहकारी समिति चंद्रपुर

 गणेश साहू की रिपोर्ट

3,850 बोरी खाद गायब, जांच में प्रबंधक को जिम्मेदार बताया; 10 अगस्त को पुलिस को पत्र, डेढ़ माह बाद भी अपराध दर्ज नहीं

सक्ती। सेवा सहकारी समिति मर्यादित चंद्रपुर में 3,850 बोरी रासायनिक खाद की कमी और 43,67,283 रुपए की आर्थिक अनियमितता/गबन के मामले में कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल खड़े हो गए हैं। सहकारिता विभाग की जांच में समिति के प्रभारी संस्था प्रबंधक पीतांबर निषाद को जिम्मेदार बताए जाने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को लिखित पत्र भेजे जाने के बावजूद अब तक अपराध दर्ज नहीं हुआ है।

मामले में खास बात यह है कि 10 अगस्त 2026 को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की चंद्रपुर शाखा के प्रबंधक ने थाना प्रभारी को एफआईआर के लिए पत्र भेजा था। इसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। करीब डेढ़ माह से अधिक समय बीतने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच प्रतिवेदन और दस्तावेज मिलने के बावजूद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की?

POS स्टॉक में मिली 3,377 बोरी की कमी

सहायक आयुक्त सहकारी संस्थाएं सक्ती मनीष खोपरागढ़ के निर्देश पर सहकारी निरीक्षक गोपाल कृष्ण श्रीवास और सहकारिता विस्तार अधिकारी नारायण सोनी ने समिति में खरीफ सीजन 2026-27 के खाद स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया था।

जांच प्रतिवेदन के अनुसार POS मशीन में दर्ज स्टॉक की तुलना में 3,377 बोरी खाद कम मिली। इसके अलावा पूर्व वर्ष की 473 बोरी खाद बचत स्टॉक में मौजूद होने के बावजूद प्रारंभिक स्टॉक में स्थानांतरित नहीं किए जाने की बात सामने आई। दोनों को मिलाकर कुल 3,850 बोरी खाद, जिसकी कीमत 43,67,283 रुपए बताई गई, की आर्थिक अनियमितता/गबन प्रतिवेदित किया गया।

जांच प्रतिवेदन में इस अनियमितता के लिए प्रभारी संस्था प्रबंधक पीतांबर निषाद को दोषी/जिम्मेदार बताया गया है।

विभाग ने दिए FIR के निर्देश, फिर भी पुलिस कार्रवाई अधूरी

मामले की गंभीरता को देखते हुए सहायक आयुक्त सहकारिता कार्यालय की ओर से जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, शाखा चंद्रपुर के शाखा प्रबंधक को पीतांबर निषाद के खिलाफ थाना चंद्रपुर में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। इसके बाद 10 अगस्त को पुलिस को पत्र भेजा गया।

अब सवाल यह है कि जब विभागीय स्तर पर जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार की गई और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर के लिए बाकायदा पत्राचार भी कर दिया गया, तो पुलिस कार्रवाई अब तक किस स्तर पर अटकी हुई है?

पुलिस और सहकारिता विभाग के बयानों में अंतर

थाना प्रभारी चंद्रपुर जितेंद्र कोसले का कहना है कि मामले में जांच अधिकारी को जानकारी के लिए थाने बुलाया गया था, लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने के कारण आगे की कार्रवाई रुक गई।

वहीं सहायक आयुक्त सहकारिता मनीष खोपरागढ़ का कहना है कि जांच अधिकारी पूर्व में संबंधित थाने में उपस्थित हुए थे और जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है।

दोनों पक्षों के इन अलग-अलग बयानों के बीच एफआईआर का मामला और उलझता नजर आ रहा है।

जांच अधिकारी ने फोन नहीं उठाया

मामले में जांच अधिकारी नारायण सोनी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में एफआईआर में देरी और पुलिस द्वारा बताई गई आपत्ति को लेकर उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।

अब निगाह कार्रवाई पर

करीब 43.67 लाख रुपए की खाद संबंधी आर्थिक अनियमितता की जांच रिपोर्ट सामने आने और एफआईआर के लिए पत्राचार किए जाने के बाद भी अपराध दर्ज नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में कब प्राथमिकी दर्ज करती है और जांच में सामने आई 3,850 बोरी खाद की कमी के लिए जिम्मेदारी किस तरह तय की जाती है।?

 

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