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सकरी थाने में ही सुरक्षित नहीं पीड़ित परिवार! खाकी के सामने झूमाझटकी और जान से मारने की धमकी *

 

सकरी थाने में ही सुरक्षित नहीं पीड़ित परिवार! खाकी के सामने झूमाझटकी और जान से मारने की धमकी के आरोप

थाने के भीतर युवक और उसकी पत्नी से कथित बदसलूकी, बाहर भी जारी रही गाली-गलौज; वायरल वीडियो के बाद थाना प्रभारी की भूमिका पर उठे सवाल*

*बिलासपुर, 17 अक्टूबर 2026। न्यायधानी बिलासपुर के सकरी थाने से जुड़ा एक मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। शुक्रवार रात करीब 10 से 10:30 बजे के बीच थाने में युवक और उसकी पत्नी के साथ कथित तौर पर झूमाझटकी, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। आरोप भाजपा कार्यकर्ताओं और जनपद उपाध्यक्ष के साथियों पर लगे हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की भूमिका और थाना प्रभारी की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

*थाने के भीतर विवाद, बाहर भी धमकियों का आरोप*

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात कुछ भाजपा ओबीसी उपाध्यक्ष सकरी थाने पहुंचे थे। इसी दौरान थाने के भीतर मौजूद युवक और उसकी पत्नी के साथ कथित रूप से विवाद और झूमाझटकी हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर संबंधित लोगों को बाहर निकाला, लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी विवाद थमा नहीं।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि थाना परिसर के बाहर भी कुछ लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज की और बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी दी। वायरल वीडियो में परिवार के सदस्य भयभीत नजर आते हैं और वीडियो बनाते हुए अपनी सुरक्षा की गुहार लगाते दिखाई देते हैं। पुलिसकर्मियों की समझाइश के बावजूद कुछ लोगों के आक्रामक व्यवहार किए जाने का भी दावा किया जा रहा है।

हालांकि, वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।

**थाना प्रभारी की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?**

मामले में सकरी थाना प्रभारी की भूमिका भी चर्चा में है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि घटना के दौरान थाना प्रभारी अपने चेंबर में मौजूद थे। आरोप है कि विवाद की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने प्रभावी पहल नहीं की। हालांकि, इस संबंध में थाना प्रभारी का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

थाना आम नागरिकों के लिए सुरक्षा, न्याय और शिकायत दर्ज कराने का भरोसेमंद स्थान होता है। ऐसे में यदि थाने के भीतर ही किसी पीड़ित परिवार को असुरक्षा का सामना करना पड़े, तो यह पुलिस की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

**वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर टिकी निगाहें**

घटना का वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल यह है कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएंगे या नहीं। आरोपों की सत्यता, विवाद में शामिल लोगों की भूमिका और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली की जांच जरूरी है। साथ ही, थाना प्रभारी की भूमिका की भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।

फिलहाल, मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान और पुलिस की कार्रवाई सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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