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*अचानक मौसम बदलाव से फसलों को भारी नुकसान, मुआवजे पर टिकी किसानों की उम्मीद*

अचानक मौसम बदलाव से फसलों को भारी नुकसान, मुआवजे पर टिकी किसानों की उम्मीद

बिलासपुर/कोटा (छत्तीसगढ़)। शमीम अंसारी की रिपोर्ट
जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत बेलगहना क्षेत्र के ग्राम पंडरा, पथरा, अमामुड़ा, रातखंडी, बरार, कोचरा और मित्थुनवगांव सहित आसपास के गांवों में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। तेज हवा, बारिश और मौसम में अस्थिरता के चलते धान, गेहूं, आम और चना (चार) की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

स्थानीय किसानों के अनुसार, फसल कटाई और तैयार होने के समय आए इस मौसम बदलाव ने सबसे ज्यादा नुकसान किया है। कई खेतों में धान और गेहूं की फसल गिर गई है, वहीं आम की फसल भी झड़ने लगी है। इससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि उन्होंने समय पर फसल बीमा कराया था, लेकिन अब उन्हें इस बात की चिंता है कि क्या उन्हें सही समय पर मुआवजा मिल पाएगा या नहीं। मौसम की अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है, जिससे बाकी बची फसल पर भी खतरा मंडरा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के प्राकृतिक आपदा की स्थिति में शासन द्वारा राजस्व विभाग के माध्यम से सर्वे कराया जाता है। जिन किसानों ने फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन कराया है, उन्हें बीमा कंपनी के माध्यम से नुकसान की भरपाई मिल सकती है। वहीं, जिन किसानों का बीमा नहीं है, उनके लिए राज्य सरकार राहत राशि (इनपुट सब्सिडी) देने का प्रावधान करती है।

अब किसानों की नजर प्रशासन और सरकार के फैसले पर टिकी है। यदि समय रहते सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है।

  • अचानक मौसम परिवर्तन से फसलों को भारी नुकसान
  • धान, गेहूं, आम और चना फसल प्रभावित
  • बीमा करा चुके किसानों को मुआवजे की उम्मीद
  • बिना बीमा वाले किसानों के लिए भी राहत की मांग
  • प्रशासन से शीघ्र सर्वे और सहायता की मांग,इस प्राकृतिक मार ने एक बार फिर किसानों की निर्भरता मौसम पर उजागर कर दी है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन कितनी जल्दी राहत पहुंचाता है और क्या किसानों को उनकी मेहनत का उचित मुआवजा मिल पाता है।

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