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*मनरेगा से आगे निकली “वी बी जी राम जी योजना”, इसलिए कांग्रेस में बेचैनी – मुशर्रफ़ खान*

मनरेगा से आगे निकली “वीबी जी राम जी योजना”, इसलिए कांग्रेस में बेचैनी – मुशर्रफ़ खान

बिलासपुर। ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार और मजदूरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। बिलासपुर ग्रामीण भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के ग्रामीण अध्यक्ष मुशर्रफ़ खान ने दावा किया है कि “वीबी जी राम जी योजना” ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से आगे निकलकर ग्रामीण मजदूरों को अधिक लाभ पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि इसी कारण कांग्रेस में बेचैनी देखी जा रही है।

मुशर्रफ़ खान ने बताया कि जहां मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, वहीं वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत जॉब कार्डधारी मजदूरों को 125 दिन का रोजगार देने का प्रावधान किया गया है। इससे मजदूरों की आय में सीधी बढ़ोतरी होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि योजना में मजदूरी दर में भी वृद्धि की गई है, जिससे महंगाई के दौर में श्रमिकों को वास्तविक लाभ मिल सके। बढ़ी हुई मजदूरी से ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा और उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उनका कहना है कि अतिरिक्त 25 दिन के रोजगार से ग्रामीणों को साल भर आर्थिक संबल मिलेगा और पलायन की समस्या में भी कमी आएगी।

मुशर्रफ़ खान ने केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों और वंचित वर्गों के हित में लगातार निर्णय लिए जा रहे हैं। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं हों या रोजगार के अवसर बढ़ाने की पहल—हर स्तर पर सरकार की प्रतिबद्धता दिखाई देती है।

इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि जब कोई योजना जमीनी स्तर पर सफल होती है और मजदूरों को वास्तविक लाभ मिलता है, तो विपक्षी दलों की असहजता स्वाभाविक है। उनका कहना था कि मनरेगा के नाम पर राजनीति करने वालों को अब जवाब मिल रहा है, क्योंकि मजदूर स्वयं बेहतर विकल्प को स्वीकार कर रहे हैं।

भाजपा नेताओं ने दावा किया कि वीबी जी राम जी योजना के माध्यम से ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल रही है और मजदूरों का सरकार पर भरोसा मजबूत हुआ है।“ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को  मजबूती मिली है ”काम और दाम बढ़ने से ग्रामीण मजदूरों में खुशी कि लहर देखने को मिल रहा है।

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