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आयुष्मान भारत योजना से बाहर होने की चेतावनी: बिलासपुर IMA की आपात बैठक में निजी अस्पतालों की गंभीर चिंता

आयुष्मान भारत योजना से बाहर होने की चेतावनी: बिलासपुर IMA की आपात बैठक में निजी अस्पतालों की गंभीर चिंता

बिलासपुर।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का मुख्य उद्देश्य देश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इस योजना से लाखों मरीजों को राहत मिली है, लेकिन अब इस योजना के क्रियान्वयन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बिलासपुर जिले के निजी अस्पतालों का जनवरी 2025 से अब तक का भुगतान लंबित है, जिसके चलते अस्पताल प्रबंधन वित्तीय संकट से जूझ रहा है। इसी गंभीर विषय को लेकर रविवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) बिलासपुर की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले के निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में सभी अस्पताल संचालकों ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की और स्पष्ट कहा कि बीते सात–आठ महीनों से लगातार भुगतान लंबित रहने के कारण निजी अस्पतालों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि वे लगातार मरीजों को बेहतर सेवाएँ दे रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की उदासीनता ने स्थिति को विकट बना दिया है।

अस्पतालों की समस्याएँ

बैठक में अस्पताल प्रबंधन ने अपनी प्रमुख समस्याएँ विस्तार से रखीं।

1. दवाइयाँ, इम्प्लांट्स, ऑपरेशन सामग्री और चिकित्सा उपकरण लगातार महँगे हो रहे हैं।
2. कर्मचारियों का वेतन, बिजली-पानी, ऑक्सीजन, लैब और अन्य आवश्यक सेवाओं का खर्च अस्पतालों को अपनी जेब से वहन करना पड़ रहा है।
3. भुगतान लंबित रहने से अधिकांश अस्पताल कर्ज़ के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
4. इन परिस्थितियों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ देना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।

31 अगस्त तक बकाया भुगतान की माँग

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि 31 अगस्त 2025 तक लंबित बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो बिलासपुर IMA और निजी अस्पताल भी रायपुर IMA तथा राज्य स्तरीय IMA के साथ मिलकर 1 सितंबर 2025 से आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कार्य बंद कर देंगे।

IMA बिलासपुर ने अपनी अपील में कहा कि अब तक निजी अस्पतालों ने जनहित को ध्यान में रखते हुए आयुष्मान योजना का भरपूर सहयोग किया है। परंतु लगातार भुगतान न मिलने से अस्पतालों की वित्तीय स्थिति गंभीर संकट में है। अस्पतालों ने स्पष्ट कहा कि अगर स्थिति का शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो मजबूरन उन्हें योजना से बाहर होना पड़ेगा।

 

IMA का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना तभी सफल हो सकती है, जब इसमें शामिल अस्पतालों को समय पर भुगतान मिले। यदि अस्पताल इस योजना से अलग हो जाते हैं, तो इसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव आम जनता पर पड़ेगा। गरीब मरीजों को इलाज के लिए या तो महँगे निजी विकल्प चुनने होंगे या सरकारी अस्पतालों पर बोझ और बढ़ जाएगा।

* शासन-प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग*

IMA बिलासपुर ने शासन-प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि बकाया भुगतान का निपटारा समय पर किया जाए। तभी इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता सुनिश्चित हो सकेगी। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आम जनता को मुफ्त इलाज की सुविधा से वंचित होना पड़ेगा और इसका सबसे बड़ा खामियाजा गरीब तबके को ही भुगतना पड़ेगा।

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