[responsivevoice_button voice="Hindi Female" buttontext="यह खबर हिंदी आडिओ में सुने "]

**निजी स्कूल संघ का कलेक्ट्रेट और डीईओ कार्यालय घेराव, शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर प्रदर्शन**

**निजी स्कूल संघ का कलेक्ट्रेट और डीईओ कार्यालय घेराव, शिक्षा विभाग के खिलाफ जमकर प्रदर्शन**
*समस्याओं के निराकरण को लेकर उठाई पांच सूत्रीय मांग, कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल*

**बिलासपुर।**
निजी स्कूल संचालकों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। अपनी लंबित समस्याओं को लेकर लगातार नजरअंदाज किए जाने से नाराज़ निजी स्कूल संघ ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय का घेराव कर दिया। इस दौरान संघ के बैनर तले जिले के दर्जनों निजी स्कूलों के संचालक, शिक्षक और स्टाफ भारी संख्या में एकत्र हुए और शिक्षा विभाग की कार्यशैली के विरोध में जोरदार नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने शिक्षा विभाग पर अनदेखी, अनियमितता और उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए। संघ के अध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा – *”हम बीते कई महीनों से शिक्षा विभाग के अधिकारियों से अपनी समस्याओं को लेकर निवेदन करते आ रहे हैं, लेकिन हर बार हमें केवल आश्वासन देकर टाल दिया गया। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि हमें सड़कों पर उतरना पड़ा है।”*

संघ की ओर से पांच प्रमुख मांगें रखी गईं, जिनमें शासकीय किताबों की समय पर आपूर्ति, स्कूल मान्यता नवीनीकरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना, अनावश्यक निरीक्षणों पर रोक, विभागीय उत्पीड़न समाप्त करना और निजी स्कूलों को सरकारी स्कूलों के समकक्ष सहयोग व सम्मान देने की मांग शामिल हैं।

मोहनलाल गुप्ता ने आरोप लगाया कि – *”प्रत्येक शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में किताबें मिलने में अनावश्यक विलंब होता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं निरीक्षण के नाम पर विभागीय अधिकारी कभी भी आकर स्कूलों में भय और दबाव का माहौल बना देते हैं।”*

संघ का कहना है कि निजी स्कूल भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, लेकिन उन्हें हमेशा संदेह की निगाह से देखा जाता है। सभी स्कूल नियमों का पालन करते हुए कार्य कर रहे हैं, फिर भी उन्हें सहयोग के बजाय प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।

प्रदर्शन के अंत में एक प्रतिनिधिमंडल ने डीईओ कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और जल्द कार्रवाई की मांग की। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इससे शिक्षा विभाग की नीतियों पर गंभीर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस प्रदर्शन को चेतावनी समझकर ठोस कदम उठाता है या फिर निजी स्कूल संचालकों को और आक्रोशित होने के लिए मजबूर करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *