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संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा: आस्था, सेवा और संस्कार का संगम**

**🔸 संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा: आस्था, सेवा और संस्कार का संगम**

**बिलासपुर।** गनियारी स्थित *संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी* में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन के तहत भगवान हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा की *प्राण प्रतिष्ठा* विधिवत रूप से सम्पन्न हुई। वैदिक मंत्रोच्चार, भक्तिभाव और परंपरागत पूजन-अर्चन के बीच संपन्न इस आयोजन ने न केवल संस्थान परिसर को पावन बना दिया, बल्कि क्षेत्रीय जनमानस में भी गहरी आध्यात्मिक छाप छोड़ी।

इस पावन अवसर पर *केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू* और *बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला* विशेष रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने संस्थान की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “हनुमान जी की प्राण प्रतिष्ठा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह नई पीढ़ी को हमारी सनातन संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने की एक प्रेरणादायी पहल है।”

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण *हनुमान जी की विशाल एवं भव्य प्रतिमा* रही, जिसे श्रद्धालुओं ने जयकारों और पुष्पवर्षा के साथ प्रतिष्ठित किया। प्रतिमा स्थापना के बाद संपन्न हुई *भव्य आरती* में छात्र-छात्राओं, फैकल्टी सदस्यों, कर्मचारियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने भारी संख्या में भाग लिया। पूरा परिसर घंटियों, शंखध्वनि और हर-हर महादेव, जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।

इस आयोजन की संपूर्ण रूपरेखा संस्थान के *संस्थापक राकेश तिवारी* और *प्रमुख सहयोगी ऋषि केसरी* द्वारा बनाई गई थी। दोनों ही व्यक्तित्वों ने संस्थान को चिकित्सा और फार्मेसी के क्षेत्र में तो नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया ही है, अब आध्यात्मिक और सामाजिक जागरण का भी वाहक बना दिया है।

राकेश तिवारी और ऋषि केसरी ने बताया कि उनकी प्रेरणा *महाबली हनुमान* की उस संजीवनी लाने वाली कथा से मिली, जिसने लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की थी। उसी भावना के अनुरूप उन्होंने यह संकल्प लिया कि *संजीवनी संस्थान भी आमजन को संजीवनी समान चिकित्सा, सेवा और संस्कार प्रदान करे।*

हनुमान जी की यह दिव्य प्रतिमा अब संस्थान की *आध्यात्मिक आधारशिला* बन चुकी है, जो आने वाले सभी शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रमों को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगी। अब यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि *श्रद्धा, सेवा और संस्कार की त्रिवेणी* बनकर उभर रहा है।

इस आयोजन से स्पष्ट है कि संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि यह एक ऐसी सोच का विस्तार है जो शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति, सेवा और अध्यात्म का गहरा समन्वय करती है।

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