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**शिक्षा गुणवत्ता में सुधार की दिशा में बड़ा कदम: बिलासपुर में अब नहीं रही कोई शिक्षकविहीन या एकल शिक्षकीय शाला**

**शिक्षा गुणवत्ता में सुधार की दिशा में बड़ा कदम: बिलासपुर में अब नहीं रही कोई शिक्षकविहीन या एकल शिक्षकीय शाला**
*— कलेक्टर संजय अग्रवाल ने दी युक्तियुक्तकरण पर विस्तृत जानकारी*

बिलासपुर, 5 जून 2025। जिले में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और समावेशी बनाने के उद्देश्य से स्कूलों और शिक्षकों के **युक्तियुक्तकरण** को लेकर जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। कलेक्टर **संजय अग्रवाल** ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि अब जिले में **एक भी स्कूल शिक्षकविहीन अथवा एकल शिक्षकीय नहीं रहा**, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा।

प्रेस वार्ता में **नगर निगम आयुक्त अमित कुमार**, **संयुक्त संचालक शिक्षा आर.एन. आदित्य**, **डीईओ अनिल तिवारी** सहित बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे। कलेक्टर ने पत्रकारों के सवालों के भी जवाब दिए।

कलेक्टर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा शालाओं और शिक्षकों का **युक्तियुक्तकरण** शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या बहुत कम है और पास में बेहतर विकल्प मौजूद हैं, उनका समायोजन कर बेहतर संसाधनों से युक्त क्लस्टर मॉडल तैयार किया जा रहा है।

**बिलासपुर जिले में अब कोई भी प्राथमिक या पूर्व माध्यमिक स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है**। जिले की 04 प्राथमिक और 04 पूर्व माध्यमिक शालाएं जो पहले शिक्षकीय रूप से कमजोर थीं, अब उनमें आवश्यकतानुसार शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों जैसे **खपराखेल, सबरियाडेरा, लोहर्सी, डिलवापारा** में 2-2 शिक्षक दिए गए हैं, वहीं चितवार, जैतपुर, तरवा, और नगोई जैसे गांवों में 3-3 शिक्षक पदस्थ किए गए हैं।

इसके अलावा, शहरी क्षेत्र की **पूर्व माध्यमिक शाला तारबहार** में 11 शिक्षक पदस्थ थे, जबकि दर्ज संख्या मात्र 142 थी। अतिशेष शिक्षकों को अन्य जरूरतमंद विद्यालयों में समायोजित किया गया है।

राज्य स्तर पर देखें तो प्राथमिक स्कूलों में 7,296 और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 5,536 शिक्षकों की आवश्यकता है। वहीं, राज्य के कुछ शहरी स्कूलों में शिक्षक अधिक हैं तो सुदूर ग्रामीण अंचलों में भारी कमी है। **युक्तियुक्तकरण से इस असंतुलन को दूर किया जा रहा है**, जिससे परीक्षा परिणामों और ड्रॉपआउट दर में सुधार की उम्मीद है।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी भी प्रकार की कटौती नहीं है, बल्कि **गुणवत्ता, समानता और सुगमता की दिशा में एक बड़ा निर्णय** है। इससे बच्चों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं, विषय-विशेषज्ञ शिक्षक, और निरंतरता युक्त पढ़ाई मिल सकेगी।

प्रशासन और शिक्षा विभाग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित न हो और शिक्षा का स्तर निरंतर बेहतर होता जाए।

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